शुक्रवार, 29 मई 2026

कविता


सुबह सुहानी आएगी

डॉ. मोहन पाण्डेय भ्रमर

 

दुख के बादल छंट जायेंगें, लाली फिर से आएगी

सूरज की किरणें चमकेंगी,सुबह सुहानी भाएगी।।

 

   दुर्गम पथ चलते चलते राह सुहानी पायेंगे

   भीगे वसनों में भी हम गीत खुशी के गायेंगे।

    महक उठेगी जीवन बगिया,घनी कालिमा जाएगी

    सूरज की किरणें चमकेंगी सुबह सुहानी भाएगी।।

 

        जिसने पाया है जग में, सुख वैभव की थाती

         भरी दुपहरी स्वेद कणें, जिन पर हैं शोभा पातीं।

    गीत सुनहरे सुनकर दुनियाँ यही कहानी गाएगी

   सूरज की किरणें चमकेगी, सुबह सुहानी भाएगी।।

 

      कम हो या गम हो राहों में, सदा विहॅसते रहते

      दुख के काँटों को सहते हैं, दुख हो धीरज सहते।

    मर्यादा की यही निशानी, तभी शिखर पर जाएगी

     सूरज की किरणें चमकेगी, सुबह सुहानी भाएगी।।

*** 


डॉ. मोहन पाण्डेय भ्रमर

हाटा, कुशीनगर


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