शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023
दोहे
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अनिता मंडा धूप नहाई तितलियाँ , महक़ बिखेरें फूल। दो पल की जादूगरी , बन जायेगी धूल।। *** जुगनू ढूँढे भोर में , पतझड़ में भी फूल। ...
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क्षणिकाएँ
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प्रीति अग्रवाल 1. मेरे हँसने पर हँसते हो रोने पर रोते , कहो तो सही तुम मेरे कौन हो... मेरे पूछने से पहले , आईना पूछ बैठा!!...
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विशेष
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प्रेम-सप्ताह कुलदीप कुमार ‘आशकिरण’ फरवरी माह इन 12 महीनों में से एक अनोखा माह है। हमें विदित है कि यह तीन वर्ष 28 दिन और चौथा 2...
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काव्यास्वादन
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ट्राम में एक याद : चेतना पारीक के बहाने विकास कुमार मिश्रा प्राचीन काल से लेकर अर्वाचीन काल तक प्रेम काव्य का केंद्रीय कथ्य रहा है। आद...
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