हाइकु
तुकाराम
पुंडलिक खिल्लारे
1.
उड़ान
क्या ली
आँसू
माँ के चहके -
हँसी
लाड़ली।
2.
गुलाबफूल
पाँव
तले कुचला –
निकली
आह।
3.
जीर्ण
वृक्ष पे
फुटे
कोमल पत्ते-
जीना
फिर से।
4.
नदी
में अब
पत्थर
ही पत्थर -
बिखरे
पर।
5.
बजी
पायल
मचल
गया मेघ -
वर्षा
ही वर्षा।
6.
लोरियाँ
गाते
फूट
पड़ी महिला –
अनाथाश्रम।
7.
सागरतट-
फिसलती
सीपियाँ –
नन्ही
मुट्ठी से।
2.
ताँका
1.
छाये
जलद
शोभायमान
भूमि
सुख
उत्सव
बूँदों
संग भजन
नदियाँ-ताल
करें।
2
फूल
काँटों का
सुंदर
जग सखी
दुख
है कहाँ
समझ
लेने में ही
सुख
समाये सभी।
3.
रोगी
बनाये
फसल
पंछियों को
धन
लालच
विद्युत
सीमा बनी
खरगोश
के लिए।
4
सुख
की स्याही
दुख
के होठों पर
उड़ी
कालिख
टूटी
प्रकाश-रेखा
भर
आया आकाश।
5.
ठण्डी...बारिश...
बर्फ
देह का हुआ
पिता
की आह
माता
ने धीरे खोली
भीगी
भीगी पलकें।
***
तुकाराम
पुंडलिक खिल्लारे
57,
‘पार्वती निवास’,
गणपती
मंदिर के पास,
लोकमान्यनगर,
परभणी
431 401 ( महाराष्ट्र)


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें