सोमवार, 31 अगस्त 2026

हाइकु एवं ताँका


हाइकु

तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे

1.

उड़ान क्या ली

आँसू माँ के चहके -

हँसी लाड़ली।

2.

गुलाबफूल

पाँव तले कुचला –

निकली आह।

3.

जीर्ण वृक्ष पे

फुटे कोमल पत्ते-

जीना फिर से।

4.

नदी में अब

पत्थर ही पत्थर -

बिखरे पर।

5.

बजी पायल

मचल गया मेघ -

वर्षा ही वर्षा।

6.

लोरियाँ गाते

फूट पड़ी महिला –

अनाथाश्रम।

7.

सागरतट-

फिसलती सीपियाँ –

नन्ही मुट्ठी से।

 

2.

ताँका

1.

छाये जलद

शोभायमान भूमि

सुख उत्सव

बूँदों संग भजन

नदियाँ-ताल करें।

2

फूल काँटों का

सुंदर जग सखी

दुख है कहाँ

समझ लेने में ही

सुख समाये सभी।

3.

रोगी बनाये

फसल पंछियों को

धन लालच

विद्युत सीमा बनी

खरगोश के लिए।

4

सुख की स्याही

दुख के होठों पर

उड़ी कालिख

टूटी प्रकाश-रेखा

भर आया आकाश।

5.

ठण्डी...बारिश...

बर्फ देह का हुआ

पिता की आह

माता ने धीरे खोली

भीगी भीगी पलकें।

***



तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे

57, ‘पार्वती निवास’,

गणपती मंदिर के पास,

लोकमान्यनगर,

परभणी 431 401 ( महाराष्ट्र)


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अगस्त 2026, अंक 74

  शब्द-सृष्टि अगस्त 2026, अंक 7 4   दिन कुछ ख़ास है! – परामर्शक [प्रो. हसमुख परमार] की ओर से...... – गोस्वामी तुलसीदास : पहुँच जिनकी जन-जन...