रघुवर अब आओ
ज्योत्स्ना
शर्मा प्रदीप
1
आलोकित
करती है
छवि
रघुनंदन की
मन
मोहित करती है ।
2
जयघोष
सभी करते
जब
-जब पाप बढ़ा
तुम
रूप नया धरते
3
रावण को मारा
था।
विजय
दिवस की जय
धरती
को तारा था।
4
इस
दिन का मान करो
विजय
धरम की है
रघुवर
का ध्यान करो।
5
जग
फिर से दुखियारा
राघव
आ जाओ
कर दो फिर उजियारा ।
6
पीड़ा
में हर
सीता
जो
जितना पावन
दुख
जीवन में बीता!
7
जग बहुत दुखी, रोगी
रघुवर अब आओ
घायल
साधू,जोगी।
ज्योत्स्ना
शर्मा प्रदीप
देहरादून


श्री राम की महिमा का गुणगान एवं उनका आह्वान करते मधुर माहिया। बहुत-बहुत बधाई । सुदर्शन रत्नाकर
जवाब देंहटाएंप्रभु श्री राम की महत्ता का गुणगान करते हुए उनका आवाहन करते सुन्दर माहिया। बधाई
जवाब देंहटाएंज्योत्स्ना शर्मा प्रदीप जी।