शनिवार, 16 जुलाई 2022

हाइकु (भोजपुरी)

 



मेघ मल्हार

इन्द्रकुमार दीक्षित

1

चढ़े असाढ़

गिरल लवन्नर

जोतऽ बियाड़ ।

2

बाड़ऽ  कसाई

सानी ना पानी,कब

 हर नधाई! ।

3

दुब्बर भाई!

जरे बियाड़, कैसे

 धान रोपाई ।

4

जरेला चाम

सहि  ना जाला अब

अतना घाम ।

5

देवी- देवता

सब केहू आ जाई

खाए नेवता ।

6

बादर भाई!

तोहरे बिनु पानी

के बरसाई ।

7

मेघ मल्हार

सब कर लालसा

पुरव  यार ।

8

बादर भाई!

बे- पानी, क गावत

बाड़ऽ  बधाई ।

9

हे डीह बाबा!

चलऽ सहर धरऽ

गाँव  में का बा?

 



इन्द्रकुमार दीक्षित

देवरिया

1 टिप्पणी:

  1. भोजपुरी एक मीठी भाषा है । इस भाषा में बरसात के सुन्दर हाइकु । इन्द्र कुमार दीक्षित जी को बधाई ।
    विभा रश्मि

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