मंगलवार, 30 मई 2023

कविता

 



जीवन मार्ग

गोपाल जी त्रिपाठी

कर्म से योग हो,योग का कर्म हो ;

देश का हो भला,यह तेरा धर्म हो ।

कर्म से योग हो-------

सत्य का -प्रेम का,नीति का-नेम का ;

तुम करो साधना,योग का क्षेम का ।

श्रेष्ठ जीवन है पाया तू वरदान में-

तू मनुज है -तेरा ध्येय सत्कर्म हो ।।

कर्म से योग हो------

नारियों को तू ममता की मूरत समझ;

बच्चों-बूढ़ों की भी तू जरूरत समझ ।

भोग के लोभ मे तू न डूबे कभी ;

पुण्य के पंथ का ही तेरा कर्म हो ।।

कर्म से योग हो------

प्राणियों पर दया खुद पे संकट तो क्या;

हो सतत शांति सर्वत्र हो निर्भया ।

ज्ञान का दान कर हो मनुजता प्रखर;

सादगी से जियो और सद्धर्म हो ।।

कर्म से योग हो------

भूमि- अंबर-अनिल-अग्नि और नीर से;

ये बनी कंचना पाये तकदीर से ।

विश्व के परिवरण का तू रखवार बन;

ये तेरा हेतु हो, ये तेरा मर्म हो ।।

कर्म से योग हो -----------


 

गोपाल जी त्रिपाठी

ग्राम पोस्ट-नूनखार,देवरिया

हिंदी प्रवक्ता,सेंट

जेवियर्स स्कूल सलेमपुर

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