शुक्रवार, 31 मई 2024

विचार स्तवक



प्रश्न को अच्छे से समझ लेना ही आधा उत्तर है।

सुकरात

 

वार्तालाप से बुद्धि विकसित होती है किंतु प्रतिभा की पाठशाला तो एकांत ही है।

एडवर्ड गिबन

 

‘माँ’ का अर्थ दुनिया की सभी भाषाओं में माँ ही होता है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर

 

जिसे स्वयं पर विश्वास न हो वह नास्तिक है।

स्वामी विवेकानंद

 

किताबों ने कहा हमें पढ़ो, ताकि तुम्हारे भीतर चीज़ों को बदलने की बेचैनी पैदा हो सके।

मंगलेश डबराल


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