मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025

कविता

सब्र

मीनू बाला

ढाई अक्षर का शब्द है सब्र,लेकिन कितना मुश्किल है इसको अपने जीवन में लाना

जो मिला और जो ना मिला उसी के साथ जीवन बिताना

आँखों से बहते आँसुओं में भी मुस्कुराना

भागती दौड़ती इस जिंदगी में भी अपने मन में एक ठहराव लाना

ढाई अक्षर का शब्द है सब्र,लेकिन कितना मुश्किल है इसको अपने जीवन में लाना ।

 

आज टटोला जब मैंने अपने जीवन को तो पूछा खुद से,

क्या तुमने भी है पहना सब्र का बाना ? या बातों में ही कहते आए हो सब्र है लाना

तो मेरी अंतरात्मा ने मुझे जवाब दिया, अभी बहुत कुछ है तुमको अपने अंदर लाना

ढाई अक्षर का शब्द है सब्र,लेकिन कितना मुश्किल है इसको अपने जीवन में लाना

 

बचपन में कहीं पढ़ा था कि सब्र एक ऐसी सवारी है

जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती,ना किसी के कदमों में और ना किसी की नजरों में

आज मैंने भी है ठाना, अब सब्र को है अपनाना,अब सब्र को है अपनाना।

लगेगा एक बार शुरू में मुश्किल इसको अपनाना,

इम्तिहान होगा तेरे सब्र का,काल भी चाहेगा तुम्हें अपने नीचे दबाना

परंतु तुम अपनी हिम्मत मत गँवाना, परंतु तुम अपनी हिम्मत मत गवाना

ऐ इंसान अगर चाहते हो अपने जीवन में कुछ पाना,

तो तुम्हें पड़ेगा सब्र को अपनाना,तो तुम्हें पड़ेगा सब्र को अपनाना ।

मीनू बाला 

(हिंदी शिक्षिका)

रा.आ.व.मा.वि.,विभाग-39सी,

चंडीगढ़

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