शनिवार, 31 जनवरी 2026

दिन कुछ ख़ास है!

 


कविता

विधाता छंदाधारित मुक्तक

मैं तिरंगा हूँ...

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश

 

कभी  आकाश  को छूते,

                           हुए मैं मुस्कुराता हूँ।

शहीदों से कभी लिपटा,

                        हुआ आँसू बहाता हूँ।।

तिरंगा  नाम  है  मेरा,

                      वसन  माँ भारती का हूँ।

वतन जयघोष जब करता,

                  खुशी से खिलखिलाता हूँ।।

***

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश

जबलपुर


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