कुत्तों
को बिस्कुट
प्रेम
नारायन तिवारी
"यह
क्या श्रीमान आप इतने नजदीक से कुत्तों को बिस्कुट खिला रहे हैं। क्या आप इनसे
डरते नहीं, मेरा तो इनको देखने मात्र से रोम-रोम
खड़ा हो जाता है।" नया-नया ठेकेदार बने श्रीधर ने चीफ इंजीनियर सुखराम से
बोले। वह चीफ इंजीनियर के लिपिक की शिकायत लेकर सुखराम जी के बंगले पर आये थे।
लिपिक उनके बिल भुगतान पर दस प्रतिशत कमीशन माँग रहा था। सुखराम जी ने कोई समस्या
आने पर मिलने के लिए कहा था।
श्रीधर
जब सुखराम जी के बंगले मे आये थे तब वह चाय पी रहे थे। उनके सामने पारले जी
बिस्कुट का एक बड़ा-सा पैकेट पड़ा था। सुखराम जी ने श्रीधर को सामने वाली कुर्सी
पर बैठने का इशारा किया। चाय पीने के साथ वह पारले जी का पैकेट उठाकर बंगले के
बाहर चले आये थे। उनके साथ ही श्रीधर भी बाहर चले आये थे। अब सुखराम जी एक- एक
बिस्कुट निकालकर कुत्तों के सामने डाल रहे थे। जो शायद दैनिक रुटीन के कारण सुखराम
जी को देख दौड़ते हुए पास आ गए थे।
"श्रीधर
जी आपको किसी कुत्ते ने काटा होगा। मगर मुझे किसी पागल कुत्ते ने नहीं काटा जो
किसी कुत्ते को बिस्कुट खिलाऊँगा। अरे भाई कुत्तों को बिस्कुट खिलाने से कोई आफत
नहीं आती। बड़ा से बड़ा रुका हुआ काम बन जाता है। आयी हुई मुसीबत टल जाती है। नर्क
मे जाने का डर नहीं रहता। ऊपर वाला पाप पुण्य सब देखता है। उससे कुछ भी छिपा नहीं
है। " सुखराम जी एक- एक बिस्कुट के साथ एक-एक फायदा गिनाकर कुत्तों को खिलाये
जा रहे थे।
पैकेट
का बिस्कुट खत्म होने के साथ सुखराम जी श्रीधर के साथ बंगले मे आ गये। "आप
किसी काम से आये थे श्रीधर जी?" पानी से अपना
हाथ धोते हुए वह बोले।
"
नहीं ऐसे ही इधर से गुजर रहा था तो सोचा आप का दर्शन कर लूँ। और देखिए न आपके
माध्यम से कितना बड़ा ज्ञान मिला। अब मैं चलता हूँ मुझे आज्ञा दीजिये।"
श्रीधर जी बोले।
"मगर अभी तो मैने आपसे कुछ कहा सुना ही
नहीं,
मुझसे कौन-सा ज्ञान मिल गया आपको? " सुखराम
जी ने आश्चर्य से पूछा।
"यही कि ऊपरवाला सब जानता है,
कुत्तों को बिस्कुट खिलाने के बहुत फायदे हैं। अब चलता हूँ ,
आज से मुझे भी कुत्तों को बिस्कुट खिलाना शुरू करना है।" ऐसा
कह श्रीधर जी तेजी के साथ वहाँ से निकल लिए।
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प्रेम नारायन तिवारी
रुद्रपुर
देवरिया


मूल उपदेश को अदृश्य रख कर भी कहानी से हम बहुत अच्छी सीख पा सकते हैं । सुंदर कहानी ।
जवाब देंहटाएंतोलेटी (हिन्दी) चंद्र शेखर, विशाखापत्तनम