गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

दिन कुछ ख़ास है !

 


महिला दिवस पर विशेष

सुरेश चौधरी

आइए जानते हैं कुछ सत्य जिन्हें मध्यकाल में परिवर्तित कर एक अभिशाप बना दिया गया और हम भारतीय नारी विरोधी हो गए नारी को ताड़ना देने वाले।

सबसे पहले हमें समझना होगा महिला दिवस क्यों मनाया जाता है, महिला दिवस की शुरुआत साल 1908 में न्यूयॉर्क से हुई थी, उन्होंने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर अपनी जॉब में समय को कम करने, अपने वेतन बढ़ाने और वोट के अधिकार की भी मांग की थी। इसके एक वर्ष पश्चात अमेरिका में इस दिन को राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया था।

इसके बाद 1917 में प्रथम विश्व विश्व युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने तंग आकर खाना और शांति के लिए विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन इतना संगठित था कि सम्राट निकोस को अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी मिला। रूसी महिलाओं ने जिस दिन इस हड़ताल की शुरूआत की थी।वह दिन 28 फरवरी था और ग्रेगेरियन कैलेंडर में दिन 8 मार्च था। तब से 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा। इस सब के बावजूद इसे आधिकारिक मान्यता कई वर्षों बाद 1975 में मिली थी।

यह थी पाश्चत्य संस्कृति जहाँ बराबरी की बात तो छोड़िए वोट देने का भी अधिकार नहीं था, आज 300 वर्ष  बाद भी अमेरिका ने एक भी महिला राष्ट्रपति नहीं चुना, यह संस्कृति नारी उत्थान के लिए जानी जाती है और हम भारतीयों को नारी शोषण, पितृसत्तात्मक प्रवृति और न जाने किन किन आरोपों से मंडित किया जाता है, पर अब आप देखिए हज़ारों हज़ारों वर्ष पूर्व लिखे गए हमारे ग्रन्थ नारी को क्या स्थान देते हैं।

ब्रह्म वेवृत पुराण में वर्णित है की राधा जी का जन्म श्री कृष्ण से ११ १/२ महीने पूर्व हुआ था, जब भगवान विष्णु ने अवतरण लेने का निश्चय किया तो सर्व प्रथम अपने हृदय को अलग कर राधा स्वरूप में अवतरित कराया, अर्थ राधा कोई अलग नही श्रीकृष्ण ही है, यहाँ आरंभ होता है अर्धनारीश्वर की कल्पना का विचार, महादेव ने जब प्रलय की कल्पना की तो उमा को अपने में समा अर्ध नारीश्वर रूप धर नृत्य किया, सत्य तो यह है की पुरुष एवं नारी दोनों के मिलन से ही व्यक्ति जन्म लेता है अतः संतति में माँ एवं बाप दोनों के जींस होते हैं अतः हर मानव में कुछ नारी प्रदत्त गुण अवश्य होते हैं यह ही अर्ध नारीश्वर है, कहने का अर्थ है कि पुरुष नारी के बिना आधा है, नारी का महत्त्व हमारे वेदों में बहुत जगह वर्णित है यह श्लोक तो जग विदित है :

--यत्र: नार्यस्तु पूजयन्ते तत्र रमन्ते देवता: ।   

यजुर्वेद २०.९ –

स्त्री और पुरुष दोनों को शासक चुने जाने का समान अधिकार है

यजुर्वेद १७.४५ –

स्त्रियों की भी सेना हो | स्त्रियों को युद्ध में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें |

यजुर्वेद १०.२६ –

शासकों की स्त्रियाँ अन्यों को राजनीति की शिक्षा दें | जैसे राजा, लोगों का न्याय करते हैं वैसे ही रानी भी न्याय करने वाली हों |

अथर्ववेद ११.७.१८ –

ब्रह्मचर्य सूक्त के इस मंत्र में कन्याओं के लिए भी ब्रह्मचर्य और विद्या ग्रहण करने के बाद ही विवाह करने के लिए कहा गया है | यह सूक्त लड़कों के समान ही कन्याओं की शिक्षा को भी विशेष महत्त्व देता है | कन्याएं ब्रह्मचर्य के सेवन से पूर्ण विदुषी और युवती होकर ही विवाह करें |

अथर्ववेद १४.१.६ –

माता- पिता अपनी कन्या को पति के घर जाते समय बुद्धीमत्ता और विद्याबल का उपहार दें | वे उसे ज्ञान का दहेज़ दें | जब कन्याएं बाहरी उपकरणों को छोड़ कर, भीतरी विद्या बल से चैतन्य स्वभाव और पदार्थों को दिव्य दृष्टि से देखने वाली और आकाश और भूमि से सुवर्ण आदि प्राप्त करने – कराने वाली हो तब सुयोग्य पति से विवाह करे |

अथर्ववेद १४.१.२०

-हे पत्नी ! हमें ज्ञान का उपदेश कर | वधू अपनी विद्वत्ता और शुभ गुणों से पति के घर में सब को प्रसन्न कर दे |

इस तरह वेदों में नारी का महत्व और भी कई ऋचाओं  में वर्णित है,

गुप्त जी की यह पंक्ति याद आती है,

दो दो मात्राओं से नारी नर से भारी है…

 

अंत में मेरी एक रचना :

 

जाग-जाग, हे नारी जाग;

तू भारत की नारी , तू जाग!

 

सहनशील- तू अति धीर -सदृशपृथा,

अनल-मध्य-तपे , तेरी यही व्यथा,

ममता-कोमलता-शीतलता,तेरी कथा !

हे नारी जाग-जाग!

 

दुर्गा बन महिसासुर संघारकरे ,

अनेक रूप धर तू  जन-कल्याण करे ,

तू उज्ज्वल देदप्यप्रमाण करे ,

हे नारी जाग-जाग!

 

सिन्दूर रक्षा-सावित्री परीक्षा-यही शिक्षा,

करे देशउत्थान-पुरुष समान,

दूध महान- तेज भानु समान !

 

-जागजाग,हे नारी जाग;

तू भारत की नारी तू जाग!

अब भारत की नारी जाग रही है…. सभी क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। वह फाइटर प्लेन भी चलाती है। इसरो में बैठ चंद्रयान भी बनाती है। वह कुशल डॉक्टर है तो सर्वश्रेष्ठ गृहणी भी, ओलिम्पिक में कमाल दिखाती है तो भारत की रक्षा के लिए सैनिक बन सीमा पर तैनात भी है। आपरेशन सिंदूर में हमने देखा भारत की नारी शक्ति का कमाल। नमन नमन माँ , बहन, पत्नी, बेटी नारी के इन सभी रूप को।

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सुरेश चौधरी

एकता हिबिसकस

56 क्रिस्टोफर रोड

कोलकाता 700046

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