शुक्रवार, 29 मई 2026

दोहे



 मालिनी त्रिवेदी पाठक

देखो दर्पण क्या कहे,

वही आप हैं आप?

कैसी काली पड़ गई,

अंतर्मन में छाप।।

 

धन सत्ता का यह नशा,

देगा क्या परिणाम।

स्वार्थ कपट के मेल से,

कब तक होगा काम।।

 

अंध मार्ग पर चल पड़े,

मानवता को भूल।

चमक-दमक का पथ दिखे,

बिछे वहीं पर शूल।।

 

देशद्रोह लालच किया,

खो बैठे संस्कार।

शिक्षा का भी कर दिया,

खतरनाक व्यापार।।

 

मानव हो पहचान लो,

अपना सच्चा रूप।

सत्य मार्ग पर चल पड़ो,

जहाँ सुनहरी धूप।।

*** 


मालिनी त्रिवेदी पाठक

वडोदरा गुजरात




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