सम्पा
विश्वास,धैर्य और संकल्प की अनूठी दास्तान
आर्या
झा
लेखक
द्वय मीनाक्षी चौधरी एवं संजीव पालीवाल द्वारा लिखित पुस्तक – “सम्पा विश्वास,धैर्य और संकल्प की अनूठी दास्तान” की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक
जीवंत किरदार को बखूबी बयां करती है और शायद यही वजह है कि इस वक़्त की यह
सर्वाधिक चर्चित किताब है जिसमें सम्पा का उठना, लड़खड़ाना, सँभलना और फिर से गंतव्य की ओर बढ़ना अनवरत संघर्ष की गाथा है जिसे
साहित्य साधकों ने सुघड़ता से कलमबद्ध किया है।
उपन्यास
के बीच-बीच में अतीत के पन्ने खुलते हैं तो एक भावुक लड़की दिखाई देती है जो
भाई-बहनों के अपने-अपने जीवन में व्यस्त होने के बाद अकेली पड़ गई है जैसा अक्सर
घर में सबसे छोटे बच्चे के हिस्से आता है। यहाँ लेखक द्वय ने नायिका के मनोविज्ञान
को खूब उभारा है। अकेलापन उसे दुखी करता है जिसे अनायास ही नायक द्वारा भर दिया
जाता है।
उपन्यास
परत दर परत खुलता है तो सम्पा का जुनून दिखता है कि किस तरह उसने बग़ैर किसी
आवश्यक जाँच-पड़ताल के सीधे रविंदर के साथ ब्याह का फ़ैसला कर लिया। वैसे भी मेरा
ये मानना है कि प्रेम, युद्ध और क्रिकेट जुनून से
ही जीते जाते हैं और इसी जुनून ने उसे हिम्मत हारने नहीं दिया।
सम्पा
को पढ़ती हुई ज़िन्दगी को जितना समझ रही थी उतनी ही उसकी निष्ठा से जुड़ती जा रही
थी कि आख़िर में इस ख़ुलासे ने उसे एक बेहतरीन इन्सान के रूप में प्रस्तुत किया जब
सम्पा को प्रवास के दौरान पति की बेवफ़ाई का सामना करना पड़ा और उस परिस्थिति में
भी उसने ख़ुद को यह सोचकर सँभाल लिया कि जैसे उसे चाय से ऑब्सेशन था वैसे उसके पति
को औरतों से।
ये
सम्पा के हृदय का विस्तार ही है जो सब देखकर भी रविंदर को क्षमा करती रही। ये तो
कोई असाधारण स्त्री ही कर सकती है। जिस तरह उसने रविंदर से प्रेम किया था उस तरह
उसने कहाँ निभाया मगर सम्पा की क्षमता को पहचानता था। जानता था वह सब कुछ कर
गुज़रेगी पर रविंदर पर आँच नहीं आने देगी,
“किसी
भी तरह सम्पा को बता देना ..वह कुछ न कुछ ज़रूर करेगी..सम्पा कुछ करेगी…”
यहीं
से शुरू होने वाले सम्पा के सफ़र को पढ़ने और समझने की प्रक्रिया इतनी रोचक है कि
जिसे पढ़कर ही समझा जा सकता है। कभी हौसलों की उड़ान लेती तो कभी टूटती सम्पा से
पाठक स्वाभाविक रूप से जुड़ता है और वह सम्पा का जीवन जीने लगता है। सम्पा न केवल
रविंदर की उम्मीदों पर खरी उतरती है बल्कि उसके जैसे अन्य लोगों के लिए के लिए भी
हर संभव कोशिश कर एक असंभव मुकाम हासिल करने में सफल होती है। सम्पा एक उत्कृष्ट
गुणों वाली लड़की है जो एक बार रिश्ते में बँधती है तो हर हाल में निभाती है चाहे
वह रविंदर को पति के रूप में पाने की ज़िद हो या उसे सोमालियाई अपहरणकर्ताओं से
छुड़ाने की।
आख़िर
में सम्पा के विश्वास,धैर्य और संकल्प की अनूठी
दास्तान बेहद रोचक एवं पठनीय किताब है जो इन्सान को कठिन परिस्थितियों से निपटने
के लिए प्रेरित करती है। इसे हर वर्ग और हर पीढ़ी को पढ़नी चाहिए।
***
पुस्तक
- सम्पा
लेखक
- मीनाक्षी चौधरी / संजीव पालीवाल
प्रकाशक
- वेस्टलैंड बुक्स
प्रकाशन
वर्ष - 2026
***
आर्या
झा
कासिनी
1978,
स्टेशन 14
ऐलियन्स
स्पेस स्टेशन
तैलापुर
-502032
हैदराबाद



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