सोमवार, 31 अगस्त 2026

गीत

 



है नाम उसी का आकाशी

दुष्यंत कुमार व्यास

 

हर-हर भोले,बम-बम भोले,

हर  कोई  बोले  आकाशी।

 

घट-घट में है वही समाया,

दिखती है बस उसकी माया।

जिसके पीछे भाग रहा है,

वह तेरे भीतर ही आया।

अगम अगोचर सब में रहता,

वह कहलाता है अविनाशी।

वही मिलेगा मंदिर में भी,

है नाम उसी का आकाशी।।

हर-हर भोले...

 

बम-बम भोले, बम-बम भोले,

नाच रहे भक्तों के टोले।

नहीं विगत की उनको चिंता,

कल की उनको नहीं विकलता।

आज! आज है उसको जीना,

वही काल का अधिशासी।

मस्त रहे अपनी मस्ती में

है नाम उसी का आकाशी।।

हर-हर भोले...

 

सभी तरफ तो बर्फ पड़ी है,

हो निर्विकार वह ध्यान धरे।

चिता भस्म को वही लपेटे,

गले मुंड के सब रत्न भरे।

होली खेलें शमशाने में,

‌ ‌है भूत-प्रेत सब का शासी।

अविनाशी जीवन दिखला दे

है  नाम  उसी का  आकाशी।।

हर-हर भोले...

 

घाट-घाट पर जले चिताएँ,

लगते हर-हर के जयकारे।

शाम-सवेरे मंत्र गूँजते,

लहर-लहर में रस के धारे।

अक्खड़पन जिसकी साँसों में,

पर कहलाता मुक्ताकाशी।

जिसे कबीरा चाहे मगहर,

वह बुला रहा है आ-काशी।।

हर-हर भोले...

***

दुष्यंत कुमार व्यास

रतलाम


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