रुड़की
: स्मृतियों का शहर
डॉ. घनश्याम बादल
जब
मन में लगन हो, लिखने वाला जिज्ञासु हो और साथ में एक
दृढ़ निश्चय हो तब व्यक्ति अपनी एक अलग राह बना लेता है । रुड़की में रह रहे
क्लासीफाइड प्रतिबिंब के मालिक शरद पांडे ऐसे ही जुझारू और लीक से हटकर कुछ करने
वाले जिज्ञासु प्रवृत्ति के लेखक हैं ।
2018 से निरंतर गहन शोध करने के बाद शिक्षा एवं इंजीनियरिंग के शहर रुड़की पर
उनकी पुस्तक ‘रुड़की: स्मृतियों का शहर’ प्रकाशित होकर आई है। पुस्तक तथ्य परक है तथा लेखक अलग-अलग तथ्य
प्रस्तुत करने के साथ-साथ उनके स्रोत भी बताते हुआ चलता है ।कह सकते हैं कि इस
पुस्तक में मनगढ़ंत कुछ भी नहीं है । किस्सागोई से हटकर सीधी सपाट और सरल भाषा में
शरद पांडे ने अपने ही संसाधनों और प्रकाशन ‘प्रतिबिंब’ से 120 पृष्ठों की यह डॉक्युमेंट्री श्रेणी की पुस्तक प्रकाशित की है जिसकी
प्रिंटिंग रॉयल प्रिंटर्स नई दिल्ली ने की है।
लेखक
का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है कि वह केवल तथ्यात्मक बातें पाठकों तक ले जाकर
रुड़की के प्रति उनकी जिज्ञासा को शांत करना चाहता है। प्राक्कथन में लेखक ने
स्वयं इस बात को कहा है, वहीं पुस्तक की भूमिका प्रसिद्ध पत्रकार एवं प्राचार्य डॉ सुशील उपाध्याय
ने लिखी है और उन्होंने पाठकों को चेताया भी है कि परंपरागत शैली की पुस्तक पढ़ने
वाले हो सकता है इस पुस्तक में ज्यादा ना बंध पाएँ लेकिन शोधार्थियों के लिए यह एक
प्रारंभिक स्रोत सामग्री का कार्य करेगी उनके अनुसार स्थानीय इतिहास में रुचि रखने
वालों के लिए यह एक अनूठा दस्तावेज है ।
पुस्तक
में कुल मिलाकर 59 विभिन्न विषय समाहित किए
गए हैं और रुड़की तथा आसपास के स्थान, व्यक्तियों एवं दूसरे
तथ्यों के बारे में पाठकों को अवगत कराया गया है।
पुस्तक बी ई जी के वॉर मेमोरियल से शुरू होकर, सुल्ताना
डाकू, सरदार मंगल सिंह, इकराम मास्टर
जी, सर हेरॉल्ड विलियम्स, भारतेंदु
हरिश्चंद्र की रुड़की यात्रा, राजा अली आबिदी, कैप्टन बी एन पांडे, अभिनेता के एन सिंह, और बाबा पूरणनाथ जैसे रुड़की से किसी ने किसी रूप में जुड़े हुए
व्यक्तियों के बारे में बताती है तो वहीं रुड़की की खासियत ड्राइंग सर्वे उद्योग,
बी ई जी का बंटवारा, सोलानी रिवर एक्वाडक्ट,
अंग्रेजों का कब्रिस्तान, द इंपीरियल गजेटे ऑफ
इंडिया और इंटरनेशनल कैनाल मॉन्यूमेंट के साथ-साथ रेलवे स्टेशन, वर्कशॉप, रुड़की नगर पालिका, चूड़ामणि
देवी मंदिर, फौजेश्वर द्वार, सीबीआई का
उद्घाटन समारोह, लाल कुर्ती बाजार आदि के बारे में बताती हुई
चलती है । बड़े ही सरल और सपाट अंदाज में लेखक रुड़की के ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं
व्यापारिक संस्थानों से परिचित कराते हुए वहां के पुराने मोहल्लों ,केवल 7 दिन चलने वाले रेडियो स्टेशन और गंगा कैनाल
के उद्घाटन समारोह से पाठकों को बांध लेता है ।
रुड़की
के साथ-साथ लेखक शरद पांडे ने मंगलौर लक्सर एवं आसपास के दूसरे इलाकों को भी इस
संस्करण में रखा है । पाठकों की जिज्ञासा को शांत करते हुए वह रुड़की के शेरों,
गांधी वाटिका, रानी धर्म कुंवर बनाम बलवंत
सिंह के विवाद और पांडवों के अज्ञातवास का गवाह बने पंचलेश्वर महादेव मंदिर आदि के
साथ-साथ नटराज आर्ट्स ग्रुप, शैलेंद्र सम्मान समिति ,सेंट गेब्रियल स्कूल जैसे रुड़की की पहचान बने संस्थाओं से पाठकों को
जोड़ते हैं।
ग्लेज
पेपर पर प्रकाशित, प्रासंगिक मुखपृष्ठ के साथ
सॉफ्ट बाउंड संस्करण में ‘रुड़की : स्मृतियों का शहर’ यहाँ के लोगों ज़िंदगी ,बातें
और किस्सों के आख्यान बताने वाली एक उपयोगी पुस्तक बन पड़ी है ।
यद्यपि
प्रवाह की दृष्टि से कई जगह भाषा थोड़ी कम रोचक लगती है लेकिन डॉक्यूमेंट्री
पुस्तकों में साहित्यिक पुट देने से उनकी प्रमाणिकता पर पड़ने वाले असर को
दृष्टिगत रखते हुए ही शरद पांडे ने इस भाषा का चयन किया है ।
शब्द
चयन, वाक्य विन्यास और श्वेत श्याम चित्र अच्छे बन पड़े हैं । केवल 150 रुपए में 120 पृष्ठों की इस पुस्तक को पढ़ना अपने
आप में बहुत कुछ देने वाला प्रतीत होता है।
कुल
मिलाकर शोधार्थियों व जिज्ञासुओं छात्रों एवं रुड़की के भूगोल,
संस्कृति , संस्थानों तथा इतिहास से अवगत होने
के इच्छुक पाठकों हेतु शरद पांडे की यह पुस्तक बहु उपयोगी सिद्ध होगी । यदि लेखक
की योजना कारगर रही तो आने वाले समय में इसके और भी संस्करण देखने को मिलेंगे।
समीक्षित पुस्तक : रुड़की स्मृतियों का शहर
लेखक : शरदपांडे
प्रकाशक: प्रतिबिंब, रुड़की
मुद्रक: रॉयल प्रिंटर्स, नई दिल्ली
पृष्ठ संख्या: 120
मूल्य: मात्र ₹150
***
डॉ. घनश्याम बादल
215,
पुष्परचना कुंज,
गोविंद
नगर पूर्वाबली
रुड़की
- उत्तराखंड – 247667




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