सोमवार, 31 अगस्त 2026

बालगीत

 

मजे बरसात के...

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश

 

लल्ली  लाली  मुन्नू  रानी।

देखो-देखो  आया  पानी ।।

जल्दी छत पर आ जाओ ।

जो हैं कपड़े पड़े उठाओ ।।

 

देखो  बाहर पड़ा अचार ।

पानी पड़े  हुआ  बेकार ।।

देखो काले-काले बादल ।

लगे कि जैसे सारे पागल ।।

 

जोर-जोर से कड़क रहे हैं ।

सबके दिल  धड़क रहे हैं ।।

नाच रही हैं छम-छम बूँदें ।

आँगन से  टकराकर कूदें ।।

 

चलो चलें सब लोग नहाएँ ।

हँसे जोर से और चिल्लाएँ ।।

डाँट पड़ेगी पड़ जाने  दो ।

ये  मौका पर मत जाने दो ।।

 

दौड़ के रद्दी कपड़े लाओ ।

नाली  में  कपड़े  लगाओ ।।

देखो आँगन हो गया फुल ।

बन गया ये स्वीमिंग पुल ।।

 

छप-छप  कर चलो नहाएँ ।

पानी में ही गिर-गिर जाए ।।

यही समय है सबसे प्यारा ।

कब आता बचपन दोबारा ।।

 ***

 


डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश

जबलपुर

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