मजे
बरसात के...
डॉ.
अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश
लल्ली लाली
मुन्नू रानी।
देखो-देखो आया
पानी ।।
जल्दी
छत पर आ जाओ ।
जो
हैं कपड़े पड़े उठाओ ।।
देखो बाहर पड़ा अचार ।
पानी
पड़े हुआ
बेकार ।।
देखो
काले-काले बादल ।
लगे
कि जैसे सारे पागल ।।
जोर-जोर
से कड़क रहे हैं ।
सबके
दिल धड़क रहे हैं ।।
नाच
रही हैं छम-छम बूँदें ।
आँगन
से टकराकर कूदें ।।
चलो
चलें सब लोग नहाएँ ।
हँसे
जोर से और चिल्लाएँ ।।
डाँट
पड़ेगी पड़ जाने दो ।
ये मौका पर मत जाने दो ।।
दौड़
के रद्दी कपड़े लाओ ।
नाली में
कपड़े लगाओ ।।
देखो
आँगन हो गया फुल ।
बन
गया ये स्वीमिंग पुल ।।
छप-छप कर चलो नहाएँ ।
पानी
में ही गिर-गिर जाए ।।
यही
समय है सबसे प्यारा ।
कब
आता बचपन दोबारा ।।
डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश
जबलपुर


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