गुरुवार, 31 अगस्त 2023

उपलब्धि विशेष

 



अब हम चाँद पर !

प्रो. पुनीत बिसारिया

 

‘आओ तुम्हें चाँद पे ले जाएँ

प्यार भरे सपने सजाएँ

छोटा सा बंगला बनाएँ

एक नयी दुनिया बसाएँ।’

आज उम्मीदों के आसमान का चाँद खिलखिला कर हँस रहा है और कह रहा है कि ‘ये चाँद से रोशन चेहरा’ और किसी का नहीं हम भारतवासियों का है क्योंकि अब हम चाँद पर हैं और चाँद को अच्छी तरह से पता है कि उसे भारत चकोर चाहता ही नहीं दिल में बसाकर भी रखता है। अब तो ‘रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा’ क्योंकि ये ‘मिलन की बेला’ अब बीतने वाली नहीं, आँखों में बसाकर सरसब्ज कर लेने की है। अब ‘चन्दा मामा दूर के’ नहीं हमारे शक्तिशाली रॉकेट से बस चन्द घण्टे, दिन और माह दूर के हैं और ये चाँद अब विक्रम का है जो प्रज्ञान से अलग होकर इस चाँद की घटाओं में चहलकदमी करेगा। अब भारत माता के लिए ‘तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी’ हो गया है। भारत गर्व से सर उठाकर कह रहा है कि हम चाँद का दीदार ही नहीं करते उस पर अपने तिरंगे की छाप भी छोड़ते हैं। अशोक स्तम्भ के सिंहों का शौर्य अब चन्द्रमा की सतह पर इसरो के पौरुष का गर्जन कर रहा है और हम सब गर्व से सीना चौड़ा करके कह रहे हैं क्योंकि ‘मेरा चाँद मुझे आया है नज़र’ क्योंकि ‘चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो, हम हैं तैयार चलो’ कैफ़ भोपाली ने पाकीज़ा फ़िल्म के लिए जब यह गीत लिखा होगा तब उन्होंने सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि वाकई हम हिंदुस्तानी चाँद पर और चाँद के पार आदित्य पर भी जा सकते हैं।

आज भारतीय वैज्ञानिकों के जज़्बे को सर झुकाकर नमन करने को जी करता है, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि चन्द्रयान मिशन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त समय की अन्तिम तिथि अर्थात आज हर हाल में यह मिशन गति पकड़ ले। चन्द्रयान तृतीय अपने साथ में लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान भी लेकर गया है, जिनके नामकरण मात्र से हम रोमांचित हैं। विक्रम बल का प्रतीक है तो विक्रम साराभाई को श्रद्धांजलि भी देता है और प्रज्ञान भारत की अपरिमित मेधा का प्रतीक है, जिसका कृत्रिम इंटेलिजेंस ज़बरदस्त है। आइए उम्मीद करें कि प्रज्ञान वहाँ शयनित होने से पहले ऐसी महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ देगा, जिनसे मानवता का कल्याण होगा और भारतवर्ष के ज्ञान का डंका दुनिया में बजेगा और यह घटना भारत के विश्वगुरु बनने की दिशा का प्रस्थानबिंदु सिद्ध होगी।

जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान।

 


प्रो. पुनीत बिसारिया

आचार्य एवं पूर्व अध्यक्ष-हिन्दी विभाग,

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय

झाँसी (उत्तर प्रदेश)

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