मंगलवार, 30 जून 2026

कविता




योग-स्मृति

मुरारी लाल शर्मा

 

 

योग !

योग तुम सचमुच मधुर हो

पर मुझे मालूम होता यदि तुम्हारा

छिपा रखा है वियोगी रूप तुमने”

मैं न तुमसे प्रीत करता।

 

योग !

क्या तुम्हारी सत्य परिभाषा नहीं यह

भ्रान्ति सलिला की कराते दूर से तुम

मरीचिका से युक्त मृग जलता अनल में

देखता तुमको तुम्हारे पास जा कर।

मैं जला हूँ या जला हो मृग

तुम्हारा दोष तो कुछ भी नहीं है

भूल थी मेरी समझ पाया न इसको

मिलन के पश्चात टूटन

यह नियति का ही नियम है।

 

पर सुनो !

रात को नभ में उदय होता शशि जब

अश्रु भर दृग में चकोरा चीखता है

चन्द्रमा कर व्यंग तब यों मुस्कुराए

पा सकेगा क्या मुझे इस जन्म में तू

रे नीड़वासी खग स्वयं को क्यों सताए

 

योग !

क्या निष्पक्ष निर्णय दे सकोगे तुम

कौन है दोषी-रुपहला चन्द्रमा

या कि निर्मल मन चकोरा

जानता हूँ - क्या कहोगे तुम-

भावना में बह गया है नीड़वासी

इसलिए सब दोष सारा है उसी का

आवेश में आकर शशि को चाहता है

 

पर जरा सोचो-ओ मन के मीत मेरे

भावना को जन्म है किसने दिया

स्पष्ट है--

शशि को निरखकर खग हिया विचलित हुआ

रूप की बरसात थी जब हो रही

दोष इतना था कि बस दो बूँद उसकी पी लिया

दृष्टि में मेरी सखे राकेश भी दोषी हुआ

 

अब नहीं स्वीकार करता पूर्णतः मैं दोष अपना

क्योंकि मेरी भावना को भी जगाया था तुम्हीं ने

रूप की लावण्यता के तुम हो दोषी

मुझको है स्वीकार भावुकता हृदय की।

 

याद है मुझको

वो पहला-पहला दिन

बहबस खिंचा था मन तुम्हारी ओर क्यों

नीरजलगे थे नयन नागिनकेश राशि

भीनी-भीनी आ रही थी मल्लिका सी महक तुमसे

भूल पाऊँगा कभी क्या उन क्षणों को

उन क्षणों की याद”

बस एक दर्द बनकर रह गयी

जो न कहनी चाहिए थी-वह कहानी कह गयी।

 

काश तुमने भी किया होता ये अनुभव

दर्द और पीड़ा की सीमा है कहाँ तक

योग - -

तुम तो दबा लोगे योग से मन की व्यथा को

क्या करे वहजो रहा हो

बस वियोगी का उपासक।

 

योग! माना दूर हो मुझसे, ये सच है

पर मुझे जब चाह होती है तुम्हारी

बंद कर दृग में सुधांशु सी छवि को

मैं हृदय के निकट तुमको देखता हूँ।

यह लिखा है गीत या कुछ और

बस इतना समझलो- -

विरह की वेदना से दूर होना चाहता हूँ

कर तुम्हें स्पष्ट, मैं दिल की कहानी।

 

अन्त में स्वीकार हो तो- एक छोटी सी विनय है

मंत्र दो मुझको सखे- उस योग का तुम

हो न पाए फिर किसी से योग मेरा 


मुरारी लाल शर्मा

नार्थ-ईस्ट दिल्ली

 

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