शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

व्यक्ति विशेष : विशेष स्मरण

 

लोक साहित्य मनीषी डॉ. अरुणेश नीरन

इंद्र कुमार दीक्षित

   डॉ. अरुणेश नीरनहिन्दी और भोजपुरी  साहित्य जगत के  वह देदीप्यमान नक्षत्र थे जिन्होंने पूर्वांचल और देवरिया जनपद की साहित्यिक/सांस्कृतिक प्रतिष्ठा का प्रकाश देश के बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय क्षितिज तक फैलाया। आपके गुरु भारतीय  वाङ्मय के अप्रतिम भाष्यकार डॉ. विद्या निवास मिश्र और साहित्य गुरु डा. शिवप्रसाद सिंह ने  आपको वह संस्कार दिया जो कविता तथा साहित्य की विविध विधाओं में छिपे सर्वहिताय लोक कल्याण की भावना को आत्मसात करके अपने जाग्रत विवेक के नेत्रों से अनुपस्थित में  भी उपस्थित को मूर्त कर देते थे। सभी को समरस भाव से सम्मान देने के उनके सलिल स्वभाव से  साहित्य से किंचित मात्र भी जुड़ा, पढ़ने लिखने वाला कोई अदना से अदना व्यक्ति भी उनके निकट जाकर अपनापन महसूस कर सकता था। इस अर्थ में  उनका नीरनउपनाम पूरी तरह सार्थक हुआ। अपने सुदीर्घ साहित्यिक जीवन में डॉ. नीरन ने शिक्षा, समाज, लोक जीवन और  साहित्य जगत को अपने अनुकरणीय आचरण और उदात्त कृतित्व से सर्वदा  अनुप्राणित किया । साप्ताहिक हिन्दुस्तान, धर्मयुग, कादम्बिनी, दस्तावेज वागर्थ, साहित्य अमृत जैसी सम्मानित पत्रिकाओं में आपकी कविताओं और सहित्यिक आलेखों को पढ़ने के लिये लोग लालायित रहा करते थे, अप्रैल1995 में  आपके नेतृत्व और मार्गदर्शन में देवरिया जैसे अख्यात स्थान में  विश्व भोजपुरी  सम्मेलन का सफल आयोजन कराकर रातो रात आपने गँवई कही जाने वाली एक लोकभाषा भोजपुरी को विश्व पटल पर स्थापित करा दिया जो आज भी देवरिया वासियों के लिये अविस्मरणीय और गौरव की बात है ।सेतुसंस्था के बैनर तले समकालीन भोजपुरी साहित्य नामक समृद्ध त्रैमासिक पत्रिका के 33 दुर्लभ अंकों का प्रकाशन और उनमें  लिखे सम्पादकीय आपके विराट साहित्यिक व्यक्तित्व के अन्यतम  दस्तावेज हैं। व्याख्यानों में  आपके वाग्मिता की अजस्र धारा  बड़े-बड़े प्रख्यात आलोचकों  और साहित्यिकों को भी चमत्कृत कर देती थी। यही नहीं  एक साहित्यिक यायावर के रूप में आपने देश विदेश की असंख्य यात्राएँ की, जिनका विवरण पढ़ने  की लालसा आपके  शुभचिंतकों को उत्सुक किये  रहती है। देश विदेश के तमाम साहित्यिक  आयोजन आपकी उपस्थिति के बिना फीके होते थे।  आपके कुशल सम्पादन में प्रकाशित पुरइन पात,‘भोजपुरी वैभव’(दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में पढाई जाने वाली पुस्तक),  ‘भोजपुरी  हिन्दी अंग्रेजी शब्दकोश’, ‘हमार गाँव’ (अपने गाँव  के बारे में भोजपुरी  हिन्दी के बीस समर्थ लेखकों का संस्मरण), ‘अक्षर पुरुष’ (पं विद्यानिवास मिश्र जी से सम्बंधित सन्समरण) तथा हाल ही में प्रकाशित देवरिया अतीत से वर्तमान तक(अनामिका प्रकाशन  प्रयाग राज से प्रकाशित जनपद देवरिया पर सन्दर्भ ग्रंथ) आजादी के अमृत महोत्सव काल में  स्वतन्त्रता संग्राम में जनपद देवरिया (उ. प्र.) महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी वि. वि. वर्षा से प्रकाशित ग्रेजी हिंदी भोजपुरी शब्दकोशऐसे संदर्भ ग्रंथ हैं जो हिन्दी भोजपुरी  साहित्य के अमूल्य निधि के रूप में रेखांकित किये जायेंगे।इसके अलावा विश्व भोजपुरी  सम्मेलन  द्वारा ‘भोजपुरी  के अमर लोकगीत’( भक्ति चक्र, जीवनचक्र, ऋतु चक्र और श्रम चक्र) नाम से मधुर लोकगीतों के चार कैसेटों  का सम्पादन भी आपकी अनुपम देन है।

         अन्तर्राष्ट्रीय संस्था विश्व भोजपुरी सम्मेलन’ के महासचिव के रूप में अपने अथक प्रयास से डॉ. नीरन ने  न केवल भोजपुरी लोक साहित्य से विश्व को परिचित कराया बल्कि अनेक देशों में इसका प्रचार प्रसार किया, इस महान कार्य के लिये  यदि आपको लोक भाषा भोजपुरी  का विश्व राजदूतकहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसके अलावा अपने गुरु प्रो.  विद्या निवास मिश्र की स्मारक संस्था विद्या श्री न्यासके न्यासी सदस्य  और साहित्य अकादमी, भारत से जुड़कर  सतत साहित्य सेवा में लगे रहे । महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय  हिन्दी विश्व विद्यालय वर्धा में अतिथि आचार्य के रूप में हिन्दी भाषा के संवर्धन के लिये अनेक ग्रंथों के सम्पादन का दायित्व सम्भाला,जो हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि हैं।

         डॉ. नीरन का जन्म देवरिया खास के सुख्यात पंक्ति पावन  ब्राह्मण परिवार में  भारत की आजादी के पूर्व जनपद के रूप में देवरिया जिला के उद्भव के साथ साथ ही 20 जून 1946 को पं  जगदीश मणि  के पुत्र के रूप में हुआ। आरम्भिक शिक्षा दीक्षा देवरिया के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में ही हुई।आप बताते थे कि देवरिया स्थित नागरी प्रचारिणी सभा में बैठकर पुस्तकों से लगाव और अध्ययन का सुदृढ़ संस्कार मिला जो आगे के जीवन का पाथेय बना। अपने गाँव देवरिया खास के सम्बंध में डॉ. अरुणेश नीरन का संस्मणात्मक आलेख पठनीय और तत्कालीन परिस्थितियों की सम्यक झलक  दिखाता है।


डॉ. अरुणेश नीरन

        1972-73 से बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर में हिंदी भाषा के प्रोफेसर और बाद के कई वर्षों तक वहाँ के प्राचार्य रहे नीरन जी  आम तौर पर  संस्थाओं में पदाधिकारी के रूप में, प्रबंधन से जुड़ना अथवा किसी प्रकार के सम्मान ग्रहण करने से जान बूझकर विरत रहने  की प्रवृत्ति रखते थे। कहा जाय तो नीरन जी के पीछे सम्मान ही भागते रहे, फिर भी  प्रतिष्ठित सहृदय संस्थाओं से उन्हों ने बहुत संकोच पूर्वक कर्मयोगी सम्मान, विद्या सागर सम्मान, भोजपुरी गौरव सम्मान और बिहारी वैभव सम्मान (बिहार सरकार) ग्रहण किया। ऐसे लोक साहित्य मनीषी पर हम देवरियावासियों को गर्व है।

             देवरिया की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था नागरी प्रचारिणी  सभा के आजीवन सदस्य  के रूप में  विभिन्न साहित्यिक समारोहों में डॉ. नीरन का सुझाव व मार्गदर्शन सभा को सदैव  मिलता रहा ।

       अक्षर ब्रह्म के अनन्य साधक  डॉ . नीरन जी  अप्रैल 2025 में जब दिल्ली अपने सुपुत्र डॉ. पारितोष के यहाँ  गए हुए थे तभी उनकी तबीयत खराब हुई, वहाँ इलाज के बाद स्वस्थ  होकर देवरिया आए पर कुछ ही दिनों के अनंतर फिर अस्वस्थ हो गए, गोरखपुर सिटी हॉस्पिटल  में भर्ती रहे, थोड़े सुधार के बाद देवरिया आए। पिछले 20 जून को देवरिया में  परिजनों और उनके शुभ चिंतकों ने देवरिया खास स्थित आवास पर उनका जन्मदिन मनाया।  दुबारा तबियत बिगड़ने पर पुनः सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया , विशेष सुधार नहीं हुआ और अंततः 19 जुलाई  2025 को वह मनहूस दिन आ पहुंचा जब उनकी आत्मा परिजनों को रोते बिलखते छोड़ महा प्रयाण पर निकल गई।  खबर सुनकर उनके आवास पर हजारों की संख्या में देवरिया वासियों, साहित्यप्रेमियों तथा शुभेच्छुओं ने नम आँखों से अपने प्रिय साहित्यकार को विदाई दिया।       

          आज डॉ. अरुणेश जी भौतिक शरीर से इस दुनिया में नहीं हैं,पर उनकी सुकृति की सुगंध  वर्षों-वर्षों तक लोगों को आप्लावित करती रहेगी।आज उनके न  रहने पर जन्मदिवस  20 जून पर  हम उन्हें  याद करते हुए विगलित   वाणी से आत्मीय प्रणाम  निवेदित करते हैं और उस महनीय  साहित्य मनीषी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ॐ शांति! शांति!! शांति!!!

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इंद्र कुमार दीक्षित

देवरिया


2 टिप्‍पणियां:

  1. दीक्षित सर् ! संक्षेप में ही समग्र परिचय के साथ अच्छा संस्मरण। पर अरुणेश नीरन जी साहित्य में भी व्यक्तिगत सम्बन्धों को महत्त्व देते थे, यह थोड़ा असहज करता था। देवरिया में भोजपुरी साहित्य की चर्चा हो और मोती बी ए उस चर्चा में उपेक्षित रहें। यह सुशोभन नहीं लगता था। -- शशिबिन्दु नारायण मिश्र

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  2. आदरणीय संपादक जी,सादर वंदन!
    विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय महा सचिव रहे स्व. अरुणेश नीरन का व्यक्तित्व
    मानवीय गरिमा का द्योतक था।आपने मेरे संस्मरणात्मक आलेख को अपनी सम्मानित
    पत्रिका शब्द ~ सृष्टि में स्थान देकर मुझे अनुगृहीत किया,एतदर्थ आपको बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद,आभार और शुभकामनाएं।
    इंद्र कुमार दीक्षित, देवरिया।

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