चलते-चलते ‘पचहत्तर’ तक.......
डॉ. पूर्वा शर्मा
नन्हा प्रयास
पचहत्तर पूर्ण!
जारी सफ़र......!
कभी-कभी सफ़र इतना खूबसूरत होता है कि हम मंजिल की चिंता नहीं
करते, वरन इस खूबसूरत सफ़र से बेहद प्यार करने लगते हैं और इसे ही अपना घर बना लेते
हैं। अपने नन्हे कदम से ‘शब्द-सृष्टि’ ने समय की दूरी नहीं वरन अनुभव की गहराई नापी
है। 18 अक्टूबर, 2020 को अपना पहला कदम रखने वाली यह वेब पत्रिका ‘शब्द-सृष्टि’
चलते-चलते ‘पचहत्तर’ अंक पर आ पहुँची। लेकिन यह ‘पचहत्तर’ केवल एक संख्या नहीं, यह
एक पड़ाव है, एक अवसर है जिसने पचहत्तर बार संवेदना-विचार-अनुभवों से सुसज्जित शब्दों
के एक नये संसार को सुधी पाठकों की स्क्रीन तक पहुँचाने का प्रयास किया है।
सर्जकों-लेखकों के लेखकीय सहयोग, पाठकों-शुभचिंतकों
की सकारात्मक प्रतिक्रियाओं के योगदान के बिना किसी भी पत्रिका की गतिशीलता, उसका प्रकाशन
संभव ही नहीं है अतएव इस शुभ अवसर पर सभी रचनाकारों-लेखकों-पाठकों-शुभचिंतकों को
हृदय की गहराइयों से धन्यवाद ! जिन्होंने इसके सौन्दर्य-गुणवत्ता
में चार चाँद लगाए। हम इस बात को भी नकार नहीं सकते कि किसी भी पत्रिका की
कुशलता-कर्मठता एवं प्रतिबद्धता के लिए परामर्शक की भूमिका बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती
है। यह ‘शब्द-सृष्टि’ का सौभाग्य रहा कि इस पत्रिका को परामर्शक के रूप में प्रो.
हसमुख परमार जैसे गुणी-विद्वान का भरपूर मार्गदर्शन-सहयोग एवं अपार स्नेह मिला।
मेरे गुरु प्रो. हसमुख परमार के इस स्नेहाशीष एवं मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद शब्द छोटा है, उनके
प्रति सदा ही मेरे हृदय में कृतज्ञता का भाव उमड़ता रहा है, उन्हें नमन! उनका आशीर्वाद
और प्रेम बना रहे बस यही कामना है।
दास्तान-ए-सफ़र में क्या पाया, क्या
सीखा?
‘पचहत्तर’ के इस सुहाने सफ़र में ‘शब्द-सृष्टि’ ने
बहुत कुछ पाया, बहुत कुछ सीखा है। शब्द-सृष्टि का उद्देश्य आरंभ से ही हिन्दी कि सेवा,
हिन्दी की विविध विधाओं को साहित्यिक मंच प्रदान करना, नवोदित रचनाकारों को अवसर प्रदान
करना रहा है। इस उद्देश्य को पूरा करते हुए साहित्य एवं साहित्यकारों से जुड़ाव स्वाभाविक
है। बतौर संपादक हर अंक के साथ बहुत कुछ नया पढ़ने-जानने-समझने का अवसर तो प्राप्त होता
ही है, साथ ही ज्ञात को और अधिक गुनने का, अपने ज्ञान-दृष्टिकोण को व्यापक करने की
संभावनाएँ बढ़ती जाती है। इसने साहित्य के प्रति मेरी रुचि को और अधिक गहरा बनाया है।
इसने मुझे सृजन-लेखन की प्रेरणा और प्रोत्साहन भी दिया। इतना
ही नहीं मेरी शोध-समीक्षा की दृष्टि में भी विकास-विस्तार हुआ है। एक रचनाकार के लिए
बहुत आवश्यक है अच्छा साहित्य पढ़ना, तभी वह अपने विचारों को, अपनी भावनाओं को कागज़
पर उतार पाता है। साहित्य को पढ़ना-समझना थोड़ा मुश्किल कार्य है लेकिन इन सबके के चलते मैं भाषा के महत्त्व, साहित्य
की उपयोगिता एवं साहित्य को पढ़ने का अर्थ जानने के सफ़र पर निकल पड़ी हूँ।
आजकल डिजिटल पब्लिशिंग से किसी भी तरह की लिखित सामग्री को
बड़ी शीघ्रता के साथ वैश्विक फलक पर यानी देश-विदेश के किसी भी कोने, किसी भी घर तक
पहुँच सकते हैं, वह भी सिर्फ एक क्लिक पर। कोरोना काल ने इस संभावना को और अधिक गति
दी। उसी का एक परिणाम है यह डिजिटल वेब पत्रिका। उपलब्धता-सरलता के चलते आज डिजिटल
पब्लिशिंग का उपयोग बढ़ गया है। लेकिन डिजिटल होने का यह अर्थ कतई नहीं है कि गुणवत्ता
में कोई समझौता हो। अपनी गुणवत्ता को कायम रखते हुए शब्द-सृष्टि ने साहित्य के प्रति
अपने कर्तव्य का पालन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आज के दौर में डिजिटल होना आवश्यता
है। स्क्रीन के महत्व-वर्चस्व को हम अस्वीकार नहीं कर सकते। ‘शब्द-सृष्टि’ के माध्यम
से मेरे डिजिटल-तकनीकी ज्ञान में वृद्धि स्वाभाविक है।
शब्द-सृष्टि के इस सफ़र में विशेषांकों का भी बहुत महत्त्व
रहा है। किसी भी लेखक, साहित्यिक प्रवृत्ति, विधा, विषय
या समकालीन प्रश्न को केन्द्र में रखकर तैयार किया गया विशेषांक केवल सामग्री का
संकलन नहीं, वह एक साहित्यिक दस्तावेज की तरह बन पड़े हैं। विशेषांकों में हमारा प्रयास
रहा है कि किसी भी विषय को विविध आयाम-दृष्टि से देख सके और एक उपयोगी सामग्री तैयार
कर सके।
‘शब्द-सृष्टि’ के रचनाकार-पाठक हमारे हमसफ़र है। इस पचहत्तर अंकों के सफ़र के बाद भी शब्द-सृष्टि का
सफ़र जारी रहेगा। साहित्य दिन-प्रतिदिन प्रगति करता है, नयी पीढ़ी के रचनाकारों के नये
अनुभव भाषा के नयेपन को लिए सामने आ रहे हैं। डिजिटल संसार हिन्दी में नयी संभावानाओं को जन्म दे रहा है। इसलिए यही कामना हैं कि आने
वाले अंक भी साहित्यिक गरिमा,
वैचारिक गहराई और भाषिक सौन्दर्य को लिए पाठकों की स्क्रीन
पर आते रहे।
और अंततः यही कहना चाहूँगी कि शब्द-सृष्टि में अभी बहुत से शब्द जन्म लेना चाहते हैं, बहुत से विचार अभिव्यक्त होना चाहते हैं। अनेक रचनाएँ पाठकों की स्क्रीन तक पहुँचना चाहती है। साहित्य के इस सफ़र को हमें और अनंत तक ले जाना है.... अस्तु ! आप सभी सर्जकों-पाठकों-शुभचिंतकों का स्नेह-सहयोग मिलता रहे इसी कामना के साथ यह अंक सभी सर्जकों-पाठकों-शुभचिंतकों को समर्पित.....।
डॉ. पूर्वा शर्मा
वड़ोदरा

शब्द-सृष्टि के पचहत्तरवें अंक के लिए बहुत-बहुत बधाई। पत्रिका ने बहुत कुछ पाया है और उससे अधिक दिया है।सम्पादकीय ज्ञानवर्धक आलेख, शब्द-सृष्टि की विशेषता हैं। यह सब आप और आपके सहयोगियों , रचनाकारों के सहयोग से ही सम्भव हो पाया है। बहुत-बहुत बधाई। ईश्वर करें पत्रिका इसी गति से आगे बढ़ती रहे । अशेष शुभकामनाएँ । सुदर्शन रत्नाकर
जवाब देंहटाएंशब्द सृष्टि के75 वे अंक का सफल सृजनात्मक सफ़र हेतु हार्दिक बधाई पूर्वा 🌸आपके सफल संपदान में ये पत्रिका निरंतर प्रगति करे ।मेरी असीम शुभकामनाएँ -कंचन अपराजिता
जवाब देंहटाएं'शब्द सृष्टि' के 75वें अंक की बहुत बहुत बधाई। मैं पत्रिका की विकास यात्रा का प्रथम अंक से ही सहयात्री हूँ, पत्रिका निरंतर विकास के नए सोपानो पर अग्रसर रही है।प्रो. परमार जी के मार्गदर्शन में पत्रिका यूँ ही विकास पथ पर बढ़ती रहे। हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ
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