कविता (मल्लिका
छंद)
जय
गणेश
डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश
देख झूलते
गणेश ।
देखते उन्हें
महेश ।।
माँ
उमा रहीं झुलाय ।
मंद-मंद मुस्कुराय ।।
मेघ ला
रहे फुहार ।
मोर गा रहे
मल्हार ।।
नृत्य भी करें भुजंग ।
मोड़-मोड़
अंग-अंग ।।
हे गणेश
एक दंत ।
कष्ट
दुःख हैं अनन्त ।।
हो
कृपा दया अपार ।
आस
से रहा निहार ।।
आज
आप दीन-द्वार ।
रोय नैन
बार-बार ।।
प्रार्थना करूँ
हजार ।
हर्ष की
बहे बयार ।।
भक्त
आपके करीब ।
किन्तु
अर्थ से गरीब ।।
नित्य
ही करूँ अधर्म ।
दूर सत्य
पुण्य कर्म ।।
डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश
जबलपुर


बहुत सुन्दर
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