बुधवार, 30 सितंबर 2026

दिन कुछ ख़ास है!

 

कविता (मल्लिका छंद)

जय गणेश

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश

 

देख  झूलते  गणेश ।

देखते  उन्हें   महेश ।।

माँ उमा रहीं झुलाय ।

मंद-मंद   मुस्कुराय ।।

 

मेघ  ला  रहे  फुहार ।

मोर  गा  रहे मल्हार ।।

नृत्य  भी करें भुजंग ।

मोड़-मोड़ अंग-अंग ।।

 

हे  गणेश   एक दंत ।

कष्ट दुःख हैं अनन्त ।।

हो कृपा दया अपार ।

आस से  रहा निहार ।।

 

आज आप दीन-द्वार ।

रोय   नैन   बार-बार ।।

प्रार्थना  करूँ  हजार ।

हर्ष  की  बहे  बयार ।।

 

भक्त आपके करीब ।

किन्तु अर्थ से गरीब ।।

नित्य ही करूँ अधर्म ।

दूर  सत्य  पुण्य कर्म ।।

*** 


डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश

जबलपुर


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