स्वागत
है दीपोत्सव!
डॉ. पूर्वा शर्मा
अब
चंद दिन ही शेष हैं जिनके गुजरते ही आगमन होगा आलोक पर्व का,
जो आलोकित करेगा हमारे घर, आँगन और मन को ।
जीवन को आनंद-उमंग के प्रकाश से जगमगाने वाले इस पर्व के भव्य स्वागत के लिए,
उसके अभिनंदन व अभिवादन के लिए हम सभी बडी उत्सुकता से तरह-तरह की
तैयारियों में जुट गए हैं। घर हो या आँगन, मन हो या जीवन जो
और ज्यादा साफ सुथरा हो, वहाँ रही और रखी हर चीज, वहाँ बसे और वहाँ से निसृत भाव-संवेदन- विचार की चमक-दमक बढे, पदार्थ-प्रकृति व स्वभाव पर रही पर्त, चाहे
धूल-मिट्टी की हो या अंधकार या फिर अज्ञान और असत्य की, उसका
तिरोभाव ही इस पर्व का संदेश है और यही इसकी सार्थकता । दीये और दीपमालाओं की
रोशनी से अंधकार को दूर करने वाले प्रकाश के साथ-साथ यह त्योहार ज्ञान, दर्शन, सदाचार, मानवीय मूल्य
और मानवीय चेतना का भी एक गहरा प्रतीक है। इस तरह के संदर्भों की चर्चा के प्रसंग
में 'तमसो मा ज्योतिर्गमय ।' 'नष्टो
मोह : स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत ।' 'अप्प दीपो भव' अंधियारा मिटाया दीपक देख्या माहीं।'
जैसे प्रसिद्ध कथनों का स्मरण भी स्वाभाविक है।
साहित्य,
जो हमारे भाव व संवेदन तथा ज्ञान-विचार-दर्शन के एक संश्लिष्ट
स्वरूप की कलात्मक प्रस्तुति है, और इस प्रस्तुति का माध्यम
है शब्द । शब्द, और वो भी साहित्य साधक - कला साधक के शब्द
जो हमारे जीवन में कितना और कैसा उजियारा फैलाता है, हम बखूबी
जानते हैं। साहित्य के शब्द एक ओर जहाँ हमारे मन का रंजन करते हैं वहीं दूसरी ओर
ये शब्द मन के मंजन का भी काम करते हैं। मन को आनंदित – आल्हादित करने वाले शब्द
हमारे मन की कालिमा को दूर कर हमें सही- गलत का विवेक बोध भी कराते हैं।
अंत
में,
‘शब्दसृष्टि’ परिवार की ओर से आप सभी को दीपावली की अग्रिम
मंगलकामनाएँ !!
डॉ.
पूर्वा शर्मा
वडोदरा

साहित्य के शब्द एक ओर जहाँ हमारे मन का रंजन करते हैं वहीं दूसरी ओर ये शब्द मन के मंजन का भी काम करते हैं। मन को आनंदित – आल्हादित करने वाले शब्द हमारे मन की कालिमा को दूर कर हमें सही- गलत का विवेक बोध भी कराते हैं।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर और सटीक विचार। दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ ।सुदर्शन रत्नाकर
बहुत अच्छा लिखा 🌸
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