महात्मा विदुर
कर्मवीर
सिंह
नीतिशास्त्र
के विदुर महात्मा, बहुत बड़े ज्ञानी ध्यानी।
धर्म
नीति की राजनीति में, पारंगत नहीं कोई सानी।
नीति
शास्त्र ---
महामन्त्री
की पदवी पाकर, गरिमा ठीक बना रखी।
उचित
निर्णय के साथ-साथ, विदुरनीति की नींव रखी।
सत्यपक्ष
के बनकर साथी, नहीं झूठ की बात कभी मानी॥
नीतिशास्त्र
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समय-समय
पर धृतराष्ट्र को, समझाने का काम किया।
पुत्र
मोह से राज मोह तक, हट जाने का काम किया।
कटु
सत्य का भान किया, लगती थी कड़वी वाणी॥
नीति
शास्त्र --
पांचाली
के चीर हरण में, लज्जित हुई सभा सारी।
निरुत्तर
सब हुये सभासद, सबकी मति गई मारी।
विदुर
चीख गरजी भारी, करते थे सब आनाकानी॥
नीति
शास्त्र ---
लाख
भवन की कूटनीति को, मूषक बिल से समझाया।
दुर्योधन
की हठ धर्मी को, धर्म विरोधी बतलाया।
बार-बार
सबको चेताया, कभी न करना नादानी॥
नीतिशास्त्र
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तन
से मन से बड़ी लगन से, हित हस्तिनापुर करते।
रहे
सुरक्षित चहुँ ओर से, सदा ये मन्त्र दिया करते।
यत्न
किया करते थे निशदिन, निर्विघ्न रहे यह रजधानी॥
नीतिशास्त्र
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लोक
कवि-कर्मवीर सिंह
जालपुर,
बिजनौर


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