बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

माहिया


रघुवर  अब  आओ

ज्योत्स्ना शर्मा प्रदीप

1

आलोकित करती  है

छवि रघुनंदन  की

मन मोहित करती  है ।

2

जयघोष सभी  करते

जब -जब पाप बढ़ा

तुम रूप नया धरते

3

रावण  को मारा  था।

विजय दिवस की जय

धरती को तारा  था।

4

इस दिन का मान करो

विजय धरम की  है

रघुवर का ध्यान करो।

5

जग फिर से  दुखियारा

राघव आ जाओ

कर दो फिर उजियारा । 

6

पीड़ा में  हर  सीता

जो जितना  पावन

दुख जीवन में बीता!

7

जग  बहुत दुखी, रोगी

रघुवर  अब  आओ

घायल साधू,जोगी।

*** 


ज्योत्स्ना शर्मा प्रदीप

देहरादून 


1 टिप्पणी:

  1. श्री राम की महिमा का गुणगान एवं उनका आह्वान करते मधुर माहिया। बहुत-बहुत बधाई । सुदर्शन रत्नाकर

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