सोमवार, 31 अगस्त 2026

अगस्त 2026, अंक 74

 



शब्द-सृष्टि

अगस्त 2026, अंक 74 


दिन कुछ ख़ास है! – परामर्शक [प्रो. हसमुख परमार] की ओर से...... – गोस्वामी तुलसीदास : पहुँच जिनकी जन-जन तक, जन-मन तक

संपादकीय [डॉ. पूर्वा शर्मा] – AI: सृजनात्मक उपयोगिता

आलेख

विकसित भारत : भाषा की भूमिका – डॉ. ऋषभदेव शर्मा

तुलसी चाखा रामरस, पत्नी के उपदेश – श्रीराम पुकार शर्मा

देह धरे का दण्ड है ? – श्रीराम पुकार शर्मा

काव्य

प्रवासी मन – प्रीति अग्रवाल

1. समझ गई मैं सावन आया 2. क्यों ऐसा सावन होता है – डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश

कहानी

जेल से घर की ओर – डॉ. नरेश सिहाग 

अग्निपथ का राही – डॉ. घनश्याम बादल

रूपांतर

मेघ ऊपर मेघ छाये, अंधकार घिर घिर आये (रवींद्रनाथ टैगौर की कविता का नवगीत में रूपांतर) – सुरेश चौधरी 

विशेष

रक्षाबंधन : पुराणों से डिजिटल तक अटल राखी प्यार भरा एक आत्मिक सफ़र रिश्तों की डोर से डिजिटल युग तक – डॉ. घनश्याम बादल 

जयतु संस्कृतम् – सुरेश चौधरी

व्यक्ति विशेष-विशेष व्यक्तित्व

महाकाव्य जैसा व्यक्तित्व : पद्मश्री डॉ. रामदरश मिश्र – शशिबिन्दुनारायण मिश्र  

क्रांति वीर चंद्र सिंह उर्फ सुराजी बाबू – इंद्र कुमार दीक्षित

उत्तर-दक्षिण के सशक्त सेतु और जन-मानस के कवि : प्रो. ऋषभदेव शर्मा – डॉ. सुपर्णा मुखर्जी

गीत 

है नाम उसी का आकाशी – दुष्यंत कुमार व्यास

देस गीत (पूरबी) – डॉ. मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’

हाइकु एवं ताँका – तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे

तेवरी – डॉ. ऋषभदेव शर्मा

शब्द संज्ञान – मन्दिर बनाम टेम्पल – अंजनी कुमार सिन्हा

बालगीत – मजे बरसात के... – डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी काव्यांश

पुस्तक समीक्षा – रुड़की स्मृतियों का शहर (शरद पांडे ) – डॉ. घनश्याम बादल

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर अंक। परामर्शक प्रो.हसमुख सर की ओर से....तथा पूर्वा शर्मा के संपादकीय के साथ सभी रचनाएँ और आलेख पठनीय। हार्दिक स्वागत और अभिनंदन!🙏💐Hiya

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  2. 🙏सादर अभिनंदन एवं हार्दिक शुभकामनाएँ ।
    शब्द-सृष्टि के अगस्त 2026, अंक-74 में अपनी सृजनशील लेखनी से साहित्य-संसार को समृद्ध करने वाले सभी आदरणीय गुरुजनों, रचनाकारों को सादर नमन एवं हार्दिक बधाई।
    आपकी लेखनी केवल शब्दों का सृजन नहीं करती, बल्कि विचारों को दिशा, संवेदनाओं को स्वर और समाज को साहित्यिक दृष्टि प्रदान करती है। इस अंक में प्रकाशित आपकी विविधवर्णी रचनाएँ आपकी साहित्य-साधना, चिंतन-समृद्धि और सृजनात्मक प्रतिभा की सुंदर अभिव्यक्ति हैं।
    माँ शारदा आपकी लेखनी को निरंतर प्रखरता प्रदान करें,
    शब्दों में संवेदना, विचारों में प्रकाश और सृजन में नवीनता बनी रहे।
    आप सभी की साहित्य-साधना निरंतर नई ऊँचाइयों को स्पर्श करे—इसी मंगलकामना के साथ सादर अभिनंदन एवं हार्दिक शुभकामनाएँ। डॉ. धर्मेन्द्रकुमार एच. राठवा , असिस्टेंट प्रोफेसर, आणंद आर्ट्स कॉलेज,आणंद पी.जी. विभाग

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अगस्त 2026, अंक 74

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